Monday, January 11, 2016

मिलो तो ऐसे
जैसे आग मिलती है कोयले से
जैसे पानी मिलता है सूखी मिटटी से
जैसे खाना मिलता है भूख से
जैसे पानी मिलता है प्यास से
बिछड़ो तो ऐसे
जैसे पत्ती बिछड़ती है पेड़ से
जैसे बूँद बिछड़ती है बादल से
जैसे रात बिछड़ती है चाँद से
जैसे शाम बिछड़ती है सूरज से