Friday, January 21, 2022

मैं

 


मैं
खुद के साथ कभी इत्मीनान से बैठा ही नहीं 
कभी तथाकथित संतों की बातों में आकर खुद को कोसता रहा 
कभी खुद पर ही मोहित हो कर नशे में झूमता रहा 
कभी इत्मीनान से खुद के साथ नहीं बैठा 
निहारते, प्यार से एक-एक आवरण को उठा कर देखते 
बिना कोसे, बिना पक्ष लिए 
बस आराम से, जैसे किसी आत्मीय के साथ