Friday, February 12, 2016
Sunday, February 7, 2016
भयंकर विभ्रम होते हैं मुझे
फ्लाई ओवर के खम्भों में गाढ़े खून के धब्बे दिखते हैं
बनती इमारत के नीचे पड़े पत्थर उठाता हूँ तो चीखें दबी मिलती हैं
खेत की मेड़ों से गुजरता हूँ तो हड्डियों से टकराता हूँ
पेड़ को छूता हूँ तो कराह सुनायी देती है
दिन में तीन बार धर्म की एंटी-डिप्रेसेंट गोली भी लेता हूँ
फिर भी धब्बे, चीखें, हड्डियाँ, कराहें मेरा पीछा नहीं छोड़ते
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