भयंकर विभ्रम होते हैं मुझे
फ्लाई ओवर के खम्भों में गाढ़े खून के धब्बे दिखते हैं
बनती इमारत के नीचे पड़े पत्थर उठाता हूँ तो चीखें दबी मिलती हैं
खेत की मेड़ों से गुजरता हूँ तो हड्डियों से टकराता हूँ
पेड़ को छूता हूँ तो कराह सुनायी देती है
दिन में तीन बार धर्म की एंटी-डिप्रेसेंट गोली भी लेता हूँ
फिर भी धब्बे, चीखें, हड्डियाँ, कराहें मेरा पीछा नहीं छोड़ते

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