शब्दों से मुठभेड़
किस्सों का कूड़ेदान
Saturday, January 28, 2017
अभी खत्म नहीं हुआ
एक चीख फाड़ देती है सन्नाटे को
एक दीप चीर देता है अँधेरे को
अभी सब खत्म नहीं है
भीतर का दर्द मोती बन गया है
तुम खोलो तो खुद को
भीतर का उजास बहने को मचल रहा है
1 comment:
Unknown
February 27, 2019 at 5:11 AM
वाह।बहुत सही।
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वाह।बहुत सही।
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